
परिचय
साथियों हमने अपने 2025 याने पिछले ब्लॉग मै बताया था कि कैसे SIR UNLIA 16.9 से जुड़ा है । हमारे 2025 के ब्लॉग को देख ले। SIR UNLIA 16.9 साथियो आज हम इस ब्लॉग में देखेंगे वोटिंग कार्ड का डाटा और SIR फॉर्म का डाटा किसके पास जाता है और कैसे जाता है इसे हम जानेंगे।
और हमने पहले ही में एक वीडियो जारी किया था और बताया था कि SIR का डाटा कौन चेक कर रहा है। कैसे AI नोटिस भेज रहा है। और हमने इस वीडियो मै आप सभी को फार्म नंबर 7 के बारे में भी बताया था। उसका लिंक यहां पर है जिन लोगो ने ये वीडियो नहीं देखा वो अभी देख ले।
आज के ब्लॉग मै हम आप सभी को बताएंगे कि SIR फॉर्म जिन लोगो ने भरा है और जिनको भी नोटिस आया है उसके पीछे कौनसा AI है और आपके वोटिंग कार्ड का डाटा किसके पास जा रहा है।
वैसे हमने अपने वीडियो मै आप सभी को हिंट दे दिया था कि किसके पास जा रहा है डाटा।। लेकिन आज के ब्लॉग मै सबूत के साथ हम बताने जा रहे है। अमेरिका की सिलिकॉन वैली से लेकर विश्व आर्थिक मंच (WEF) के वैश्विक मंचों तक, आज तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल पहचान और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार चर्चा हो रही है। और इस एजेंडा पर काम किया जा रहा है ।
दूसरी तरफ भारत में भी सरकारी सेवाएँ और चुनावी प्रक्रियाएँ तेजी से डिजिटल हो रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है:
भारत के नागरिकों का संवेदनशील चुनावी डेटा किसके तकनीकी ढाँचे पर निर्भर है, और उस पर वास्तविक नियंत्रण किसका है?
यह सवाल केवल तकनीक का नहीं, बल्कि डेटा सुरक्षा, राष्ट्रीय डिजिटल संप्रभुता और नागरिकों के मताधिकार का भी है।भारतीय लोकतंत्र का सबसे संवेदनशील और संप्रभु दस्तावेज- देश के 140 करोड़ नागरिकों का चुनावी डेटा और मतदाता सूची – क्या विश्व आर्थिक मंच और अमेरिकी वेंचर कैपिटलिस्टों वैश्विक स्तर पर बदनाम सिंडिकेट्स के सर्वरों पर गिरवी रख दिया गया है?
अब तक चुनाव आयोग पर केवल पक्षपात, मनमाने पुनरीक्षण (SIR) और अधिकारियों के राजनीतिक रिश्तों के आरोप लग रहे थे। भारत के चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ‘ECINet’ का बैकएंड, डेटा आर्किटेक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर किसके हाथों में है?।।
क्या है NxtGen और ECINet का नाता ? by atul mishra nagpur

चुनाव आयोग द्वारा संचालित ‘ECINet’ वह सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म है जिससे देश भर की मतदाता सूचियों का निर्माण, संशोधन, वोटरों का ‘ऑटो-डिलीशन’ और बैकएंड मैनेजमेंट तय होता है।
बेंगलुरु स्थित NxtGen Datacenter & Cloud Technologies एक निजी डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी है, जो सरकारी और अर्ध-सरकारी डेटा होस्टिंग नेटवर्क से जुड़ी रही है। ECINet के डेटा आर्किटेक्चर, सर्वर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने और होस्ट करने में इस निजी कंपनी की सीधी संलिप्तता है।

अमेरिकी वेंचर कैपिटलिस्ट विनोद खोसला का निवेशः NxtGen कोई स्वतंत्र भारतीय स्टार्टअप नहीं है। इसमें अमेरिकी सिलिकॉन वैली के अरबपति विनोद खोसला की वेंचर कैपिटल फर्म ‘खोसला वेंचर्स’ (Khosla Ventures) मुख्य संस्थागत निवेशक रही है। इसके अलावा, NxtGen ने खोसला द्वारा समर्थित अमेरिकी कंपनी ‘आकाश सिस्टम्स’ (Akash Systems) के साथ डायमंड-कूल्ड एआई सर्वर्स की आपूर्ति के लिए 2.7 करोड़ डॉलर (लगभग 225 करोड़ रुपये) का बड़ा रणनीतिक समझौता भी किया है।

जब लोगो को 2021 को कोविड वैक्सीन दी जा रही थी तब आकाश सिस्टम को विश्व आर्थिक मंच द्वारा चुन लिया गया। by atul mishra nagpur

अब इस से आप सबको क्या समझ आता है ।
क्या हमने जो बात आप सबको पहले बता दी क्या वो ही आपको अब सबूत के तौर पे देखने के लिए मिल रहा है। इसलिए जागरूक रहना बहुत जरूरी है।
डाटा देने से पहले आप सभी को 100 बार सोचना चाहिए। की हम ये डाटा किसको दे रहे है। अब सवाल आता कि विनोद खोसला विश्व आर्थिक मंज का कौन है।
नीचे सबूत देखे !

अब इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है। अमेरिकी निवेशक विनोद खोसला केवल Khosla Ventures के संस्थापक नहीं हैं, बल्कि विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की आधिकारिक वेबसाइट पर उन्हें “Agenda Contributor” एजेंडा योगदानकर्ता के रूप में भी सूचीबद्ध किया गया है।
यह कोई अनुमान नहीं, बल्कि WEF की अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी है।अब आप सभी को समझ आ ही गया होगा इसके पीछे कौन है ।। क्यों सारी सरकार विश्व आर्थिक मंच पर जाती है।।। हम कई बार आप सबको बताते आए है सरकार किसी की भी हो ।।चुन के आता विश्व आर्थिक मंच का कलुवा ( KLAUS SCHWAB) ही है ।।
अब ये बात साबित हो ही गई।।।
विनोद खोसला का EPSTIEN बिलगेट्स के साथ क्या कनेक्शन था । ये देखिए एपस्टीन की चैटिंग। by atul mishra nagpur

इन बच्चे खाने वालों को आप अपना डाटा दे रहे हो।ये पूरा खेल पशु शासन का है।
और लोग शौक़ से अपना डाटा पशु को दे रहे तो वो पशु बनाएगा ही ना। डाटा तो दे दिए हो आगे तैयार रहो कार्बन टैक्स और फूड क्राइसिस के लिए। इसपर हमने पहले ही चेतावनी दे दिया है।
अतुल मिश्रा नागपुर !
