लेखक: अतुल मिश्रा, नागपुर
एक अजीब और रहस्यमय दर्शन
दर्शन साथियों, आज 16 अप्रैल 2021 है। आज मैंने एक ऐसा अजीब दर्शन देखा, जिसने मेरे मन में कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। मैंने अपनी आँखों के सामने एक बहुत लंबी लाइन देखी। लाइन इतनी लंबी थी कि उसका अंत दिखाई नहीं दे रहा था।
उस लाइन में ज्यादातर महिलाएँ खड़ी थीं। किसी के हाथ में कागज़ था, तो किसी के हाथ में फॉर्म। मैंने देखा कि एक-एक करके महिलाएँ आगे जा रही थीं और अपना नाम, पहचान और व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करा रही थीं।
फिर अचानक पूरा दृश्य बदल गया।
कागज़ से डिजिटल सिस्टम तक
ऐसा लगा जैसे समय कई साल आगे बढ़ गया हो। वही महिलाएँ फिर उसी तरह एक लंबी लाइन में खड़ी थीं। लेकिन इस बार उनके हाथ में कोई कागज़ नहीं था। अब सब कुछ एक डिजिटल सिस्टम में बदल चुका था।
और तभी मुझे एक शब्द दिखाई दिया—
CBDC
इसके बाद मैंने देखा कि लोगों को मिलने वाले लाभ और सरकारी सहायता अब डिजिटल रूप में दी जा रही है।
लेकिन दर्शन में इसके बाद एक और महत्वपूर्ण दृश्य सामने आया।
लाभ लेने से पहले स्वास्थ्य रिकॉर्ड?
मैंने देखा कि एक महिला किसी लाभ को प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ती है।
उसे बताया जाता है:
“पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति की पुष्टि करो।”
इसके बाद वैक्सीनेशन और स्वास्थ्य रिकॉर्ड जैसी चीजों की चर्चा सामने आती है। मुझे ऐसा दिखाई दिया कि अलग-अलग डिजिटल प्रणालियाँ एक-दूसरे से जुड़ रही हैं—
- Digital ID
- Government Welfare Schemes
- Digital Payments
- Health Records
- Vaccination Records
- CBDC
और इसी दृश्य ने मेरे मन में एक बड़ा सवाल पैदा किया।
क्या भविष्य में किसी सरकारी लाभ की पात्रता केवल पहचान और आय पर निर्भर नहीं रहेगी?
क्या ऐसा संभव है कि भविष्य में किसी व्यक्ति की पात्रता किसी डिजिटल या स्वास्थ्य रिकॉर्ड से भी जुड़ जाए?
यह केवल एक कल्पना या संभावना का सवाल है—लेकिन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इस पर चर्चा करना महत्वपूर्ण जरूर है।
जब पूरी व्यवस्था डिजिटल हो जाए
दर्शन यहीं खत्म नहीं हुआ। मैंने देखा कि वह विशाल लाइन धीरे-धीरे एक बहुत बड़े डिजिटल सिस्टम में बदल रही है। हर व्यक्ति की पहचान डिजिटल थी। हर भुगतान डिजिटल था।
हर सरकारी लाभ डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज था। और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी भी उसी डिजिटल ढाँचे का हिस्सा बनती दिखाई दे रही थी।
तभी मेरे मन में एक चेतावनी जैसी भावना आई—
जब पैसा डिजिटल हो जाए, पहचान डिजिटल हो जाए और स्वास्थ्य रिकॉर्ड भी डिजिटल हो जाएँ, तब इन सभी प्रणालियों को आपस में जोड़ने की शक्ति कितनी बड़ी हो सकती है?
यहीं से सवाल केवल तकनीक का नहीं रह जाता।
सवाल बन जाता है—
इस डिजिटल व्यवस्था पर नियंत्रण किसके पास होगा?
और उससे भी महत्वपूर्ण—
नागरिक की स्वतंत्रता और निजता कितनी सुरक्षित रहेगी?
Welfare + Digital ID + CBDC + Health Data
इस दर्शन ने मेरे मन में एक विशेष संभावना का सवाल छोड़ा:
क्या आने वाले समय में Welfare + Digital ID + CBDC + Health Data एक ही डिजिटल ढाँचे का हिस्सा बन सकते हैं?
आज ये प्रणालियाँ अलग-अलग उद्देश्यों के लिए विकसित होती दिखाई देती हैं। लेकिन भविष्य में यदि इनके बीच व्यापक तकनीकी एकीकरण होता है, तो इससे सरकारी सेवाओं को अधिक कुशल बनाया जा सकता है।
साथ ही, इसके साथ गोपनीयता, डेटा सुरक्षा, निगरानी और नागरिक स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठेंगे।
तकनीक अपने आप में अच्छी या बुरी नहीं होती।
असल सवाल यह है कि—
डेटा किसके पास होगा?
उसका इस्तेमाल कैसे होगा?
किसे उस डेटा तक पहुँच मिलेगी?
और सबसे महत्वपूर्ण—
क्या नागरिक के पास अपनी डिजिटल पहचान और व्यक्तिगत डेटा पर पर्याप्त नियंत्रण रहेगा?
क्या कुछ लोग इस व्यवस्था से अलग रहेंगे?
दर्शन में एक और विचित्र दृश्य दिखाई दिया। ऐसा लगा कि कुछ चुनिंदा लोग इस पूरे सिस्टम से अलग रहेंगे। मैं इस दृश्य का निश्चित अर्थ नहीं बता सकता। यह केवल मेरे अनुभव का एक हिस्सा था।
लेकिन इसने एक और सवाल खड़ा किया—
यदि भविष्य में समाज का अधिकांश हिस्सा एक एकीकृत डिजिटल व्यवस्था पर निर्भर हो जाए, तो क्या हर व्यक्ति के लिए उस व्यवस्था से बाहर रहने का विकल्प भी मौजूद रहेगा?
यह प्रश्न भविष्य की डिजिटल व्यवस्था के लिए शायद सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों में से एक हो सकता है।
यह भविष्यवाणी नहीं, एक प्रतीकात्मक अनुभव है
मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मैं यह दावा नहीं करता कि मैंने भविष्य को निश्चित रूप से देख लिया है।
यह केवल एक दर्शन और प्रतीकात्मक अनुभव है।
ऐसे में यह सोचना स्वाभाविक है कि यदि भविष्य में ये सभी प्रणालियाँ आपस में जुड़ती हैं, तो उनके प्रभाव कितने व्यापक हो सकते हैं।
अंतिम सवाल
16 अप्रैल 2021 के इस दर्शन ने मेरे मन में एक सवाल छोड़ दिया है—
क्या भविष्य में Welfare + Digital ID + CBDC + Health Data मिलकर एक विशाल डिजिटल व्यवस्था का निर्माण कर सकते हैं?
और यदि कभी ऐसा हुआ, तो सबसे महत्वपूर्ण सवाल तकनीक का नहीं होगा।
सवाल होगा—
उस तकनीक पर नियंत्रण किसके पास होगा?
नागरिक के डेटा की सुरक्षा कौन करेगा?
क्या व्यक्ति को अपनी डिजिटल पहचान और व्यक्तिगत जानकारी पर नियंत्रण रहेगा?
और क्या डिजिटल व्यवस्था से बाहर रहने का विकल्प भी नागरिकों के पास होगा?
यह दर्शन निश्चित भविष्यवाणी नहीं है। यह केवल एक प्रतीकात्मक अनुभव और उससे उत्पन्न प्रश्न हैं।
— अतुल मिश्रा, नागपुर
